सफलता की कहानी :- अजय ने कुछ ऐसा किया जो छत्तीसगढ़ में इतिहास बना, पहले प्रयास में लक्ष्य साधा......

सफलता की कहानी :- अजय ने कुछ ऐसा किया  जो छत्तीसगढ़ में इतिहास बना, पहले प्रयास में लक्ष्य साधा......

बीजापुर(छत्तीसगढ़)

जहां बम, बंदूक और बारूद की आवाज इतिहास के पन्नो पर दर्ज होती है। अब वहा के युवाओं में कुछ कर दिखाने के जुनून से गढ़ने लगा इतिहास । क्योंकि यह इलाका अतिनक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। जिस तरेम ( टेकुलगुडम) मुठभेड़ में 22 जवानों की शहादत हुई थी। इस खूनी मुठभेड़ की गूंज इलाके में गुंजायमान थी लेकिन टेकुलगुडम मुठभेड़ स्थल से महज 15 किलोमीटर दूर चिलकापल्ली में युवा अजय मोडियम छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के सबसे बड़े पद के लिए तैयारी में लगा था। अजय ने कुछ ऐसा किया है जो छत्तीसगढ़ में इतिहास बन गया है।

पहले प्रयास में लक्ष्य साधा

अजय मोडियम ने अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है. अजय ने पहले ही प्रयास में ओवर आल छत्तीसगढ़ में 98 वीं और ST रैंक में पहला स्थान अर्जित किया है। जिसके बाद अजय मोडियम का डिप्टी कलेक्टर बनना तय हो चुका है।अजय से पहले उसूर क्षेत्र से ही प्रीति दुर्गम, हिमांशु दुर्गम, सत्येंद्र के जी और अर्चना दुर्गम छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से चयनित हैं ।जो प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।जबकि अब अजय ने भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

अजय की यह सफलता उसके कड़ी मुश्किलों के बाद मिली है. क्योंकि खपरैल घर, मिट्टी, कीचड़ से सने सड़कों से राजधानी में तैयारी का कांटो से भरा सफर, एक तरफ माओवादी दहशत तो दूसरी तरफ गरीबी और किसानी से गुजर बसर जिंदगी. यानि हर तरफ से परेशानी ही परेशानी. ऐसी कठिन और दुर्गम परिस्तिथि और हालातों से जूझते अजय ने 2019 में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की तैयारी शुरू की। अपने पहले ही प्रयास में अजय की कामयाबी ये बताने के लिए काफी है कि प्रतिभाव को कोई चुनौती नहीं रोक सकती. चाहे वह माओवाद हो या फिर गरीबी या पिछड़ापन. क्योंकि प्रतिभा अपना रास्ता खुद चुनती है।

नक्सल इलाके में शिक्षा से ही बदलाव संभव

अजय बताते हैं कि बम, बंदूक और बारूद से मन व्यथित तो होता है।कई बार परेशान भी हो जाता था, जबकि क्षेत्र में होने वाली घटनाओं का असर भी मनोबल पर पड़ता था। लेकिन अगर इलाके में बदलाव लाना हो तो शिक्षा से ही संभव है. मेरा प्रयास होगा कि अंदरूनी गांवों के और भी युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करें और सफल हों. क्योंकि इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र में अगर बदलाव लाना है तो वह बदलाव शिक्षा से ही लाया जा सकता है। अजय की इस सफलता पर न केवल उसका परिवार खुश है, बल्कि गांव के लोगों में भी खुशी का माहौल है। गरीब और गांव के परिवेश में कृषक परिवार के अजय की पीएससी में चयन से क्षेत्रवासियो में भारी खुशी है। अजय की कामयाबी पर क्षेत्रवासी और युवाओं का बधाई देने का का तांता लगा हुआ है। अजय मोडियम की कामयाबी की खबर के बाद बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने अपने आवास पर गुलदस्ता देकर बधाई शुभकामनाएं दीं हैंय विक्रम मंडावी ने बताया कि बीजापुर में अजय जैसे प्रतिभाओं की कमी नहीं है ऐसे प्रतिभाओं को हरसंभव मदद और मौका देंगेय बीजापुर कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने भी अजय मोडियम को बधाई देते उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।