और कितनी निर्भया... पारुल केशवानी

और कितनी निर्भया... पारुल केशवानी

देश में मासूमो के साथ हो रही हैवानियत न उम्र कैद से डरती है न फासी के कानून से डरती है।ये धरती के राक्षस किसी से नहीं डरते मासूमों के साथ ज्यादती करने वाले बेखौफ हैं । दिल को झकझोर कर रख देने वाली घटनाएं आम हो चली हैं ,जिन्हे सुनकर हर बार डर लगता खौफ का साया हर ओर कौहरे की तरह छा जाता है इस डर ने हर एक महिला को इस दुनिया में मौजूद यहां तक की घर में बैठे खून के रिश्तों पर भी शक करने को मजबूर कर दिया इन दिनों जो घटनाएँ सामने आ रही है उन्हें  जानने के बाद ऐसे लगता है मानो किसी पर भरोसा ही न किया जाए.. 

देश की राजधानी दिल्ली में हुई मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया 


नांगला से आई इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली को शर्मसार किया है निर्भया के बाद आरोपियों को हुई सजा और फांसी से भी इस तरह के हैवानों के हौसले पस्त नहीं हुए दिल्ली में ही फिर दुष्कर्म की घटना सामने आई है...जहां 9 साल की बच्ची शमशान में पानी लेने गई थी लेकिन घर नही लौटी...जब परिवार वाले ढूढने पहुंचे तो उन्हे बच्ची मृत अवस्था में मिली नरपिशाचों ने बच्ची को मार डाला ।बताया जा रहा है कि दलित बच्ची के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म के बाद हत्या की गई है परिवार वालों को पुजारी ने पुलिस को जानकारी न देने और अंतिम संस्कार के लिए राजी कर लिया ।मामले में चारों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं। जिसको लेकर दिल्ली में सियासत गर्म है ।वही मप्र में विदिशा जिले से घटना सामने आई है जहां 12 साल की मासूम का शव पेड पर लटका मिला दुपट्टे से उसके हाथ बंधे थे और शव को पेड पर लटका दिया था मासूम की दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है तीसरी घटना मे एक महिला को ऑटों ड्रायवर ने अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की लेकिन महिला भाग कर डायल 100 तक पहुंची और ऑटो चालक फरार हो गया पुलिस ऑटो वाले की तलाश कर रही है ।


इन तीन घटनाओ में पहली दिल्ली से जिसमें पुजारी और अन्य गिरफ्तार हुए दूसरी घटना में गांव के लोगो पर ही शक गया  और तीसरी में महिला की सूजभूज और हिम्मत से वो बच गई।
ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर हमारा समाज किस ओर जा रहा है समाज में बैठे कुछ चंद लोग जो पूरे समाज को गंदा कर रहे है । अपराध की घटनाए दिन ब दिन बढ रही है ।ज्यादातर घटना को अंजाम देने वाला घर का या करीबी ही होता है...ये तमाम रिसर्च सामने है ।लेकिन ऐसे संवेनशील मुद्दे जिनमें दुष्कर्मी न फांसी से डरता है न सजा से ऐसी घटनाओ को रोकने के बजाय राजनीति हो रही है.


मामले में चिकित्सा शिक्षामंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि बीजेपी की सरकार में कम्प्लेन  दर्ज करने में तेजी आई है,कांग्रेस की सरकार में पीडिता को कम्प्लेन  करने भटकना पड़ता था । सवाल ये भी की क्या महज़ कम्पलेन  करने से मामलो में कमी आएगी कम्प्लेन  तो घटना के बाद होगी ,लेकिन घटना न हो इसको लेकर क्यो किसी सरकार के पास कोई उपाय नहीं है। जब घर के या करीबी ही राक्षस हों तो अपराध कैसे रूकेंगे?


राजनीति से परे विपक्ष या सत्तापक्ष या कोई भी राजनैतिक नुमाइंदा क्या इस बात पर विचार कर रहा है ,कि उस दूषित मानसिकता को कैसे खत्म करे जो आपके आस पास मौजूद लोगों में पनप रही है,उस पर कैसे काबू पाएँ ,भले  ही आपने कपडे कैसे भी पहने हो गंदी सोच औऱ हवस से भरा हैवान आपको गंदी नजर से ही देखेगा  फिर चाहे वो बाहर से कोई भी चोला ओढे हो , ये राक्षस मासूम बच्चियों को अपना आसान शिकार मानते है और इसलिए भी छोटी बच्चियां पर इनकी नजरें गढी हुई रहती है औऱ पहचान न हो सके, कहीं पकडे न जाएं ,तो ये डरपौंक उनको मौत की नींद सुला देते है। इस समाज में सभी तरह के लोग है डॉक्टर टीचर इंजीनियर राजनेता नीति निर्माता सभी , लेकिन  क्या कोई उपाय किसी के पास है कि कैसे इन हैवानों से बचा जाए इन नरपिशाचों को इस समाज में पनपने ही न दिया जाए लेकिन इसपर कोई विचार नहीं करता राजनेता राजनीति करते है आरोप लगाते है अपना उल्लू सीधा करते है , असल समस्या की जड को नेस्तनाबूत करने  शायद कोई पॉलीसी बनी ही नहीं ।जिसका अफसोस हर महिला हर बेटी को है और जबतक ये डर रहेगा तब तक ये अफसोस भी जिंदा रहेगा.


पारुल केशवानी