अगर आप बार-बार बदलते हैं अपनी नौकरी, तो बंद करा दें पुराना सैलरी अकाउंट, नहीं तो हो सकती है परेशानी

सैलरी अकाउंटरी जीरो बैलेंस पर खोला जाता है. अगर उसमें तीन महीने तक सैलरी नहीं पहुंची तो वह बचत खाते की श्रेणी में आ जाता है. नियमों के तहत बचत बैंक खातों में एक मंथली एवरेज बैलेंस रखना होता है, जो न्यूनतम 500 रुपए से लेकर 10 हजार तक हो सकता है.

अगर आप बार-बार बदलते हैं अपनी नौकरी, तो बंद करा दें पुराना सैलरी अकाउंट, नहीं तो हो सकती है परेशानी
सेलरी अकाउंटरी जीरो बैलेंस पर खोला जाता है

IT इंजीनियर सुमित हैदराबाद से तीन साल बाद फिर से गुरुग्राम लौटे, तो पुराने अकाउंट (Bank Account) के बारे में पता करने बैंक  में पहुंच गए. मैनेजर ने उनसे छह हजार रुपए जमा कराने को कहा तो वह सन्न रह गए. सुमित की मजबूरी यह है कि उनकी सैलरी (Salary) अब इसी बैंक में जाएगी. और इसमें दूसरा खाता खुल नहीं सकता. यह समस्या सिर्फ सुमित की ही नहीं है. जो लोग बार-बार जॉब (Jobs) बदलते हैं और पुराने सैलरी अकाउंट को बंद नहीं कराते, तो उन्हें इस तरह की समस्या से दो-चार होना पड़ता है. सुमित को समझ नहीं आ रहा है कि गुरुग्राम छोड़ते समय उनके खाते में 1200 रुपए जमा थे तो फिर बैंक छह हजार रुपए और क्यों मांग रहा है.

दरअसल, सैलरी अकाउंट जीरो बैलेंस पर खोला जाता है. अगर उसमें तीन महीने तक सैलरी नहीं पहुंची तो वह बचत खाते की श्रेणी में आ जाता है. नियमों के तहत बचत बैंक खातों में एक मंथली एवरेज बैलेंस रखना होता है, जो न्यूनतम 500 रुपए से लेकर 10 हजार तक हो सकता है. न्यूनतम राशि जमा न रखने पर बैंक अपनी पॉलिसी के हिसाब से आपके खाते से पैसे काटना शुरू कर देता.

बैंक में खाता खुलवाने पर कोई अलग से चार्ज नहीं लगता लेकिन बहुत से बैंक अपने डेबिट कार्ड पर कुछ फीस लेते हैं. ये फीस सालाना 100 से 1000 रुपए तक होती है. अगर आप अपने अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तब भी आपको डेबिट कार्ड की फीस भरनी पड़ेगी. बैंक आपके फोन पर SMS भेजने का चार्ज भी वसूलते हैं, जो 30 रुपए प्रति तिमाही हो सकता है. इस राशि पर 18 फीसदी जीएसटी अलग से वसूला जाता है. इस तरह बैंक आपके खाते से विभिन्न मदों में पैसा काटता रहता है. जब खाते में जमा राशि शून्य हो जाती है, तो आपके ऊपर पेनाल्टी के पेनाल्टी जुड़ती चली जाती है. इस रकम जमा न करने पर बैंक आपको डिफॉल्टर भी घोषित कर सकता है. ऐसी स्थिति बनने पर आपका सिबिल रिकॉर्ड खराब हो सकता है.

12 महीने तक कोई लेनदेन नहीं करने पर क्या होगा?

अगर आप अपने बैंक अकाउंट में लगातार 12 महीने तक कोई लेनदेन नहीं करते हैं, तो बैंक आपके खाते को इनएक्टिव अकाउंट मान लेगा. अगर इसमें अगले 12 महीने तक कोई लेनदेन नहीं होता है, तो यह खाता डॉर्मेंट अकाउंट की श्रेणी में आ जाता है. हालांकि, इनएक्टिव अकाउंट में बैंक लेनदेन करने को बैंक मना नहीं करते, लेकिन किसी डॉर्मेंट अकाउंट से आप नेट बैकिंग, एटीएम ट्रांजेक्शन या मोबाइल बैंकिग नहीं कर सकते. यहां तक की बैंक आपको डेबिट कार्ड, चेक बुक और पता बदलने के लिए भी मना कर सकते हैं.

टैक्स एवं इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट बलवंत जैन कहते हैं कि व्यावहारिक तौर पर तो बैंकों को पेनाल्टी काटने से पहले ग्राहक को सूचना देनी चाहिए. होमलोन और पर्सनल लोन के मामले में वह ऐसा करते भी हैं. अगर किसी खाते में जमा राशि शून्य हो जाती है तो उसे बंद कर देना चाहिए. लेकिन कमाई के चक्कर में बैंक नैतिकता को ताक पर रखकर लोगों की जेब ढीली कर रहे हैं.

कुल मिलाकर, मौजूदा व्यवस्था में जरूरत से ज्यादा बैंक खाते रखने में कोई समझदारी नहीं है. अगर आप किसी बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो उसे तुरंत बंद करा देना चाहिए.