जाने क्यों सिंहदेव को हेलीकॉप्टर मुहैया न कराना और उसके दूसरे दिन अचानक 4 हेलीकॉप्टर की व्यवस्था मंत्रियों के लिए होना

छत्तीसगढ़ में बड़े नक्सली हमले की आशंका के मद्देनजर मंत्रियों के हेलीकॉप्टर से प्रदेश दौरे की व्यवस्था की गई है. स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के पहले दिन प्रदेश दौरे के लिए राज्य सरकार द्वारा हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं कराया गया. अगले दिन राज्य सरकार ने चार-चार चौपर की व्यवस्था कर दी है.

जाने क्यों  सिंहदेव को हेलीकॉप्टर मुहैया न कराना और उसके दूसरे दिन अचानक 4 हेलीकॉप्टर की व्यवस्था मंत्रियों के लिए होना
प्रतीकात्मक फोटो

रायपुर: स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के प्रदेश दौरे के लिए राज्य सरकार ने हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं कराया गया. जिसके बाद सिंहदेव किराए के हेलीकॉप्टर से प्रदेश के दौरे पर रवाना हुए. उसके दूसरे दिन अचानक राज्य सरकार, मंत्रियों के प्रदेश दौरे के लिए 4 हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कर दी है. इस हेलीकॉप्टर से स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, कृषि मंत्री रविंद्र चौबे और आबकारी मंत्री कवासी लखमा प्रदेश का दौरा कर रहे हैं. राज्य सरकार अचानक लिए गये इस निर्णय ने सबको चौंका दिया है.

सिंहदेव को हेलीकॉप्टर मुहैया न कराना

सिंहदेव को हेलीकॉप्टर मुहैया न कराना और उसके दूसरे दिन अचानक 4 हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कर दी गई. जिस पर वरिष्ठ पत्रकार शशांक शर्मा ने बताया कि इंटेलीजेंट ने एक महत्वपूर्ण खबर दी है कि नक्सली कोई बड़ी वारदात प्रदेश में कर सकते हैं. संभव है कि इसी महीने आज से लगभग 9 साल पहले का जो झीरम घाटी कांड हुआ था. सरकार शायद उससे घबराकर मंत्रियों को सड़क मार्ग से न भेजकर उनके लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कर रही है. शशांक ने कहा कि सरकार की अपनी रणनीति है. एक तरफ सरकार कहती है कि उनके पास पैसे नहीं है और दूसरी तरफ चार-चार हेलीकॉप्टर से दौरा करती है. सुरक्षा के दृष्टिकोण से बात की जाए तो मंत्रियों की सुरक्षा जरूरी है. इसलिए इस तरह का निर्णय लेना जरूरी हो जाता है.

वरिष्ठ पत्रकार शशांक शर्मा ने कहा कि प्रदेश में एक ही हेलीकॉप्टर है. उसमें स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जा रहे थे. इस कारण से सिंहदेव के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था नहीं हो सकी होगी. इसके बाद उन्होंने अपनी स्वयं की व्यवस्था की, लेकिन दूसरा पक्ष है कि वे बस्तर के दौरे पर हैं और जो काफी संवेदनशील क्षेत्र है. इसलिए इंटेलिजेंट की रिपोर्ट के बाद शायद सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया हो. कोई अनहोनी घटना घट गई तो उसका सारा दारोमदार सरकार के ऊपर आ जाएगा. हो सकता है इस कारण से भी राज्य सरकार ने निर्णय लिया है.

झीरम घाटी नक्सली हमला

 झीरम घाटी की घटना 25 मई 2013 को हुई थी. इस घटना की जांच के लिए आयोग का गठन 28 मई 2013 को किया गया था. उल्लेखनीय है कि बस्तर के झीरम घाटी में नक्सलियों ने तत्कालीन कांग्रेस विधायक नंदकुमार पटेल (Congress MLA Nandkumar Patel) के काफिले पर हमला किया था. इस हमले में नंदकुमार पटेल, महेन्द्र कर्मा सहित कांग्रेस की टॉप लीडरशिप आहत हुई थी. वे सभी शहीद हो गए थे. जबकि घटना में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल (Former Union Minister Vidya Charan Shukla) गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका इलाज के दौरान बाद में निधन हो गया था.