Coronavirus Third Wave: 2 साल के बच्चों को वैक्सीन लगाने वाला पहला देश बना क्यूबा, जानें भारत में क्या है प्रोग्रेस

कहना मुश्किल है कि क्यूबा की वैक्सीन भारत या अन्य देश लगवाना चाहेंगे या नहीं! एक अहम बात यह भी है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से क्यूबा के वैक्सीन को मान्यता नहीं दी गई है.

Coronavirus Third Wave: 2 साल के बच्चों को वैक्सीन लगाने वाला पहला देश बना क्यूबा, जानें भारत में क्या है प्रोग्रेस

Corona Vaccine for Children: कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने दुनियाभर के देशों को बहुत नुकसान पहुंचाया है. इसकी तीसरी लहर आने की भी आशंका जताई जा रही है. देश में महाराष्ट्र, केरल जैसे राज्यों में तो स्थिति गंभीर बनी हुई है. कहा जा रहा है कि तीसरी लहर में बच्चों को नुकसान होने की संभावना है. देश में काफी तेजी से वैक्सिनेशन तो हो रहा है, लेकिन बच्चे अबतक टीकाकरण से दूर हैं.

कारण कि देश में बच्चों के लिए वैक्सीन अभी तक नहीं आई है. हालांकि भारत समेत दुनिया भर के कई देशों में बच्चों की वैक्सीन पर ट्रायल चल रहा है. इस बीच क्यूबा में दो साल के बच्चों को कोरोना की वैक्सीन लगाई गई है. क्यूबा दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जहां पर इतने कम उम्र के बच्चों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा रही है. चीन, यूएई और वेनेजुएला जैसे देशों ने भी छोटे बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगाने की घोषणा की है लेकिन अभी इसकी शुरुआत नहीं की गई है.

क्यूबा में ही तैयार की गई है वैक्सीन

क्यूबा में बच्चों को जो वैक्सीन लगाई जा रही है, वह क्यूबा में ही तैयार की गई है. क्यूबा में अब्दला और सोबराना नाम की कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही है. बच्चों पर इनका क्लीनिकल ट्रायल पूरा हो गया है. ट्रायल पूरा होते ही बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगाने की शुरुआत कर दी गई.

बच्चों को लगाई जा रही है वैक्सीन

क्यूबा की रेग्युलेटरी अथॉरिटी की निदेशक ओल्गा लीडिया जैकोबो के मुताबिक, बच्चों पर क्लीनिकल ट्रायल का मूल्यांकन किया गया. क्यूबा के सिएनफ्यूगोस शहर में ही इस आयुवर्ग के बच्चों को वैक्सीन लगी है. क्यूबा में 3 सितंबर को 12 साल से अधिक उम्र वाले बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगनी शुरू हुई थी और फिर 6 सितंबर से 2 से 11 साल के बच्चों को भी वैक्सीन लगाई जाने लगी.

क्या अन्य देश लगवाएंगे क्यूबा वाली वैक्सीन?

इस बारे में कहना मुश्किल है कि क्यूबा की वैक्सीन भारत या अन्य देश लगवाना चाहेंगे या नहीं! एक अहम बात यह भी है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से क्यूबा के वैक्सीन को मान्यता नहीं दी गई है. कोई भी देश बाहरी वैक्सीन को अपने यहां ट्रायल के बाद ही मान्यता देता है. हालांकि भारत समेत कई देशों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वैक्सीन पॉलिसी में थोड़ी ढील दी है, लेकिन क्यूबा की वैक्सीन के साथ एक बड़ी दिक्कत ये भी है कि इसे WHO ने भी मान्यता नहीं दी है.

भारत में बच्चों की वैक्सीन की स्थिति

भारत में भी 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को कोरोना वैक्सीन देने की तैयारी चल रही है. फिलहाल जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन को देश में आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है. उम्मीद की जा रही है कि इसी महीने के आखिर तक भारत में भी बच्चों की वैक्सीन देने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. कहा जा रहा है कि इसी साल दिसंबर तक 18 वर्ष से कम उम्र वालों के लिए 3 से 4 वैक्सीन को अप्रूवल मिल सकता है.

2 वर्ष से 18 वर्ष आयुवर्ग के लिए भारत बायोटेक की को​वैक्सिन का भी ट्रायल चल रहा है. कहा जा रहा है कि यह वैक्सीन इसी महीने के आखिर तक आ सकती है. इस एज ग्रुप के लिए यह दुनिया की एकमात्र वैक्सीन कही जा रही थी. हालांकि क्यूबा ने भी अपने यहां दो वर्ष के बच्चों के वैक्सिनेशन की शुरुआत कर दी है.

ICMR-NIV के सहयोग से विकसित की गई वैक्सीन Covaxin का 2 से 18 आयु वर्ग के बच्‍चों के लिए फेज-2 और फेज-3 का ट्रायल चल रहा है. इसको लेकर ICMR-NIV की निदेशक प्रिया अब्राहम ने पिछले दिनों एक इंटरव्यू के दौरान सितंबर में वैक्सीन उपलब्ध होने की उम्मीद जताई थी.