डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की दुहाई देने वाली बीजेपी पार्टी क्या उनके परिश्रम को भूल चुकी? जनसंघ से बीजेपी की यात्रा के 70 वर्ष पूरे होने का ख्याल संगठन को क्या याद रहा?

डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की दुहाई देने वाली बीजेपी पार्टी क्या उनके परिश्रम को भूल चुकी? जनसंघ से बीजेपी की यात्रा के 70 वर्ष पूरे होने का ख्याल संगठन को क्या याद रहा?

बिलासपुर। गुरुवार को जनसंघ से बीजेपी की यात्रा को 70 वर्ष पूरे हुए। जनसंघ की स्थापना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 21अक्तूबर 1951 को दिल्ली में की थी।  यह पार्टी वर्ष 1951 से 1977 तक अस्तित्व में रही।  इस दौरान पार्टी का चुनाव चिह्न दीपक था। उसको लेकर बीजेपी शासित राज्य मध्यप्रदेश में कमल की आकृति बनाकर दीप कमल जलाकर स्थापना दिवस मनाया गया। वहीं छत्तीसगढ़ प्रदेश के कई जिलों के साथ ही बिलासपुर में बीजेपी के नेता स्थापना दिवस मनाना शायद भूल गए? इसे क्या संगठनस्तर पर कमजोरी कहें या सत्ता से विहीन होने की निष्क्रियता?

भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ प्रदेश में 15 साल तक सत्ता चलाई और बीजेपी का स्थापना वर्ष भी मनाया, लेकिन जनसंघ का नहीं। अब ऐसा क्या हुआ कि जैसे ही सत्ता परिवर्तन हुआ और पार्टी संगठन व बीजेपी नेता भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों व कई जगहों में स्थापना दिवस मनाई। लेकिन प्रदेश में कई जगहों में संगठन बिखरा हुआ रहा और इसे मनाना भूल गए? केवल कुछ नेताओं ने सोशल मीडिया में इसको लेकर पोस्ट किये, लेकिन जैसा आयोजन होना था, नदारद रहा। बिलासपुर जिला इकाई में तो आयोजन ही नहीं हुआ। बिलासपुर बीजेपी संगठन के नेताओं से चर्चा करने पर उन्होंने मंडल स्तर पर कार्यक्रम होने की जानकारी दी, लेकिन कार्यक्रम हुआ इसको लेकर प्रेस विज्ञप्ति और फोटो तक जारी नहीं कर सके।

जिस श्यामा चरण मुखर्जी का नाम बीजेपी एकात्मकवाद के प्रणेता के रूप में लेती है और उसका जिक्र कई मंचों में करना अपनी शान मानती है। लेकिन इतने वर्षों तक जनसंघ में अपने प्राण फूंकने वाले और बीजेपी को खड़ा करने वाले डॉ. मुखर्जी के परिश्रम को क्या गैर शासित राज्यों के बीजेपी संगठन व नेताओं ने ही भुला दिया?

इतिहास में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लागू आपातकाल (1975-1976) के बाद जनसंघ सहित भारत के प्रमुख राजनैतिक दलों का विलय कर एक नये दल जनता पार्टी का गठन किया गया। भारतीय जनसंघ वैचारिक रूप से आरएसएस के करीब था। बीजेपी नेता मानते हैं कि जनसंघ की नीतियों की प्रासंगिकता वर्तमान में भी है। इसके बावजूद भी जनसंघ की स्थापना दिवस को नहीं मनाना इसे क्या मानवीय भूल कही जा सकती?