राष्ट्र के प्रति अपना सर्वस्व न्योछावर करने में क्षण भर की देर ना करने की वीरगाथा का गान है लता मंगेशकर :- बजरंग दुबे

राष्ट्र के प्रति अपना सर्वस्व न्योछावर करने में क्षण भर की देर ना करने की वीरगाथा का गान है लता मंगेशकर :- बजरंग दुबे


सिनेमाजगत के लिए बेहद दुखद खबर है. कई दशकों से अपनी मधुर आवाज से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाली स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का निधन हो गया है. लता जी ने 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा.


छत्तीसगढ़ के युवाओं के प्रेरणा स्रोत संयुक्त कलेक्टर बजरंग दुबे ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि कुछ पंक्तियों में दी है जिसमें उन्होंने कहा है कि मन कर रहा लिखता ही जाऊं लेकिन कहीं भी ख़त्म नहीं कर पाऊंगा इसलिए इस छोटे से नगण्य पुत्र की तरफ़ से  अपनी माँ(आई) समान देवी माँ को हृदयविदारक आत्मीय पीड़ा के साथ अश्रुपूरित भावभीनी श्रद्धांजलि  दी....

सुबह जब हमारी आँख खुलती है तो परम पिता का पावन स्मरण और धरती माँ को प्रणाम करते हैं इस भाव का नाम है लता मंगेशकर। 

हमारे ईश्वर , हमारे पूज्य माता-पिता जो हमारी हर ईच्छा व्यक्त करने के पूर्व ही उसे किसी भी हाल में पूरा कर देना चाहते हैं,उस प्रेम रूपी आशीर्वाद की प्रतीक हैं लता मंगेशकर। 

जब हम प्रातः सबसे पहले प्रभु की आराधना करते हैं तब जो तृप्ति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है उस मनोभाव का नाम है लता मंगेशकर। 

भोजन के रूप में ईश्वर के प्रसाद स्वरूप अन्न को ग्रहण करते हैं तो जो कृतज्ञता का भाव उमड़ता है उसकी अभिव्यक्ति हैं लता मंगेशकर। 

किसी फूल समान कोमल अबोध बच्चे को देखकर, गोद में खिलाकर उसे पुचकार कर जो वात्सल्य रस प्राप्त होता है उस अद्वितीय प्रेम का साकार रूप हैं लता मंगेशकर। 

किसी अभिन्न मित्र के सुख दुख का साथ उसका कभी ना टूटने वाला प्रेम और विश्वास उसकी परिणीति हैं लता मंगेशकर। 

किसी प्रेमी युगल के दो होकर भी किसी एक में अपनी पूरी दुनिया ,अपने सारे सपने संजोने का दूसरा नाम है लता मंगेशकर। 

राष्ट्र के प्रति अपना सर्वस्व न्योछावर करने में क्षण भर की देर ना करने की वीरगाथा का गान है लता मंगेशकर। 

और ना जाने ऐसे कितने ही मनोभाव होंगे जो लताआई के ब्रह्म ध्वनि के बिना अधूरे ही कहलाएंगे। 

लताआई अब हमारे बीच भौतिक रूप से नहीं होंगीं लेकिन देश,काल ,परिस्थिति सबको औचित्यविहीन कर देने में सक्षम और इस समूचे ब्रम्हांड की सबसे सुंदर उनकी आवाज़ युगों युगों तक अनंतकालीन शाश्वत सत्य के रूप में विद्यमान रहेगी। 

समृद्ध,शांत व्यक्ति हों या राष्ट्र अपनी सच्ची परिसंपत्तियों का बखान नहीं करते  कुछ विशिष्ट अवसरों पर ही बताते हैं कि वो किस चीज के स्वामी हैं।


परम आदरणीय भारत रत्न लताआई हमारे समृद्ध राष्ट्र की वही परिसंपत्ति हैं जिसे लेकर भारत अपनी छाती चौड़ी कर कहता है कि हमारे पास "लता मंगेशकर" हैं। 

मन कर रहा लिखता ही जाऊं लेकिन कहीं भी ख़त्म नहीं कर पाऊंगा इसलिए इस छोटे से नगण्य पुत्र की तरफ़ से  अपनी माँ(आई) समान देवी माँ को हृदयविदारक आत्मीय पीड़ा के साथ अश्रुपूरित भावभीनी श्रद्धांजलि 


कोटि कोटि नमन 

#लता मंगेशकर आई (1929 - अनंतकाल )
#ॐशांति