कैसे बिक गई मोहतरा की घास छोटे जंगल की जमीन, सरपंच एवं ग्रामीणों ने नामांतरण के लिए लगाया रोक,पटवारी बोले अधिकारियों का आदेश नहीं मानेंगे तो निलंबित होने का रहता है खतरा....

कैसे बिक गई मोहतरा की घास छोटे जंगल की जमीन, सरपंच एवं ग्रामीणों ने नामांतरण के लिए लगाया रोक,पटवारी बोले अधिकारियों का आदेश नहीं मानेंगे तो निलंबित होने का रहता है खतरा....

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) श्रीओम 

कैसे बिक गई मोहतरा की घास छोटे जंगल की जमीन रजिस्ट्री कराकर बेच दिया जांजगीर जिले के महिला ने खरीदी जमीन सरपंच एवं ग्रामीणों ने नामांतरण के लिए लगाया रोक उच्चाधिकारियों की आदेश नही मानने पर सस्बेंड होने का रहता है डर 


बिलासपुर जिले के मस्तूरी तहसील कार्यालय में चाहे अवैध प्लाटिंग का खेल हो या फिर शासकीय जमीनों पर कब्जा जोरों पर है जमीन की आसमान छूती कीमतों में धन जमीन दलालो और कुछ अधिकारियों को बड़ा मुनाफा हो रहा है भू माफिया राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारी पंजीयक कार्यालय और उनको राजनीतिक संरक्षण देने वालों में किसानों की कृषि भूमियों पर भी बिना डायवर्शन कराए अवैध प्लाटिंग हो रही है । वही राजस्व विभाग के अधिकारी उस रास्ते से गुजर जाते परन्तु यह अवैध प्लाटिंग नजर नही आता  
आज हम बात कर रहे हैं मस्तूरी के ग्राम पंचायत मोहतरा का जहा घास छोटे जंगल की भूमि को फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कर दिया गया  बताया जा रहा है ग्राम पंचायत मोहतरा पहन.31 तहसील मस्तूरी   भूमि मूल खसरा नम्बर 7 रकबा जो कि 15 एकड़ के आसपास  एकड़ जो वर्ष 1928-29 के मिशल बंदोबस्त में छोटे झाड़ के जंगल और घास मद में दर्ज चला आ रहा है जिसमे से मूल खसरा नम्बर 7 की भूमि को खसरा नम्बर 7/5 शामिल खसरा 22/3 रकबा 1.00 एकड राजस्व अभिलेख में दर्ज कराकर  ग्राम मोहतरा  निवासी अभिषेक कुमार पिता आशा राम, रथ बाई पति आशाराम ने छोटे झाड़ के जंगल और घास मद दर्ज भूमि लगभग 1 एकड़ भूमि को जांजगीर जिले के ग्राम  ठठारी निवासी महिला श्रीमती प्रेमन चन्द्रा पति  पीलादाउ चन्द्रा के पास बेच दिया गया जिसका रजिस्ट्री भी इसी माह में हो गया जिसकी शिकायत मोहतरा के सरपंच एवं ग्रामीणों ने मस्तूरी तहसील में नामांतरण और रजिस्ट्री में रोक लगाने के लिए शिकायत  दर्ज किया है

अवैध ढंग से रजिस्ट्री की जा रही है पटवारी किसी भी जमीन का खसरा रकबा नंबर और जमीन का उपयोग दर्शाते हुए B1 नकल लेता जिसके आधार पर पंजीयक कार्यालय जमीन की रजिस्ट्री करता है और राजस्व के सक्षम अधिकारी इन जमीनों का नामांतरण करते हैं जमीन की खरीदी बिक्री में सरकारी कर्मचारी और अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण है ऐसे में कोई भूमाफिया बिना इनके संलिप्तता की भू माफिया सरकारी जमीनों की रजिस्ट्री कैसे करवा लेता है पर जमीन की दलाली में सब के हित सध रहे हैं रहे हैं इसलिए दिखावे की कार्यवाही भी नहीं होती ना पटवारी पर न पंजीयक पर ना राजस्व के अधिकारियों पर कोई कार्यवाही नही की जा  रही है

पटवारी विजय कुमार साहु का कहना है कि जमीन का सिविल कोर्ट से लुप्त करने का आदेश हुआ था और अपने उच्च अधिकारियों के निर्देश के आधार पर हमने काम किया है उच्च अधिकारियों का आदेश नहीं मानेंगे तो निलंबित होने का डर रहता हैं । जो बिक्री किया है वह गलत तरीके से किया है 


रजिस्टार तिर्की
का कहना है कि हमने जो पटवारी   रिकार्ड के आधार और बीवन में घास जमीन दर्ज नहीं होने के वजह से रजिस्ट्री हुआ है पटवारी के द्वारा बनाया गया रिकार्ड को मान्य होने के बाद ही रजिस्ट्री हुआ है