AT4: बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने में है सक्षम...साब के इस हथियार को भारतीय सेनाओं ने किया सिलेक्ट

एटी4 एंटी-टैंक सिंगल शॉट हथियार का उपयोग भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना द्वारा किया जाएगा. एक प्रतिस्पर्धी कार्यक्रम के जरिए इसे चुना गया है.

AT4: बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने में है सक्षम...साब के इस हथियार को भारतीय सेनाओं ने किया सिलेक्ट
भारतीय सेना (फाइल फोटो)

भारतीय सशस्त्र बलों (Indian Armed forces) ने साब (Saab) के एटी4 एंटी-टैंक सिंगल शॉट हथियार (AT4 anti-tank single shot weapon) को सिलेक्ट किया है. एटी4 एंटी-टैंक सिंगल शॉट हथियार का उपयोग भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना द्वारा किया जाएगा. एक प्रतिस्पर्धी कार्यक्रम के जरिए इसे चुना गया है. साब इंडिया (Saab India) ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी. एटी 4 का उद्देश्य पैदल सेना इकाइयों को बख्तरबंद वाहनों और किलेबंदी को नष्ट करने का एक साधन देना है. AT4 को 1960 के दशक के अंत में स्वीडिश सेना द्वारा अपनाया गया था.

गौरतलब है कि पिछले महीने पाकिस्तान और चीन की हरकतों को देखते हुए भारतीय सेना को कुछ अचूक हथियार मिले हैं, जिससे वह अपने दुश्मनों को रोकने में सक्षम हो सके. यह है एंटी-पर्सनेल और एंटी-टैंक माइंस जो भारत में ही विकसित किए गए हैं. यही नहीं लद्दाख में कड़ाके की सर्दी में मोर्चा संभालने वाले जवानों की सहायता के लिए सेना ने अपनी विशेष खरीद शक्तियों का इस्तेमाल करके ऐसे पंप भी मंगवाए हैं, जिनसे उन्हें ऊंचाई वाले स्थानों पर पानी और ईंधन की समस्या दूर होगी.

भारतीय सेना के अधिकारियों के मुताबिक, ‘भारतीय सेना के इंजीनियर कोर को नई एंटी-पर्सनेल और एंटी-टैंक माइंस सेट मिले हैं, जो दुश्मन की पैदल सेना और सशस्त्र कमान या अपने क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों के खिलाफ फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस के रूप में काम करेगी.

सैनिकों के लिए नया पोशाक

भारतीय थल सेना ने सैनिकों के लिए शनिवार को नया पोशाक जारी किया. इसे आरामदेह और जलवायु अनुकूल है तथा इसकी डिजाइन कंप्यूटर की मदद से तैयार किया गया है. यह पोशाक जैतून और मिट्टी के रंग सहित मिश्रित रंगों वाली है. इसे सैनिकों की तैनाती स्थल और वहां की जलवायु दशाओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है.

सूत्रों ने बताया कि विभिन्न देशों की सेनाओं की पोशाकों का विश्लेषण करने के बाद राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के सहयोग से नई पोशाक की डिजाइन तैयार की गयी है. उन्होंने बताया कि यह पोशाक कहीं अधिक आरामदेह है और इसे हर तरह के भू-भाग में उपयोग किया जाएगा. यह एक ‘डिजिटल डिसरप्टिव’ पद्धति वाला भी है.