कोरोना का दूसरी लहर और मधुमेह

कोरोना का दूसरी लहर और मधुमेह

कोरोना संक्रमण मधुमेह रोगियों पर न सिर्फ संक्रमण के दौरान बल्कि संक्रमण के उपरांत भी गंभीर प्रभाव क्यों डाल रहा है। कोरोना काल चल रहा है इसीलिए लोग निसन्देह कोरोना को लेकर ज्यादा बातें करते है लेकिन कोरोना के साथ ही एक अन्य मुद्दा भी है जो आजकल लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है वह है कोरोना और मधुमेह का संबंध। कोरोना के शुरुआती दौर से ही माना जा रहा था कि यह संक्रमण कोमोरबिडिटी विशेषकर मधुमेह जैसी परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों के लिए ज्यादा समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। यह सत्य भी रहा क्योंकि मधुमेह से पीड़ित लोगों में कोरोना संक्रमण का प्रभाव अपेक्षाकृत ज्यादा तथा गंभीर रूप में नजर आया।

वर्तमान समय में जब हम कोरोना की दूसरी लहर से लड़ रहे हैं मधुमेह के मरीजों को आज भी संक्रमण के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जा रहा है। यही नहीं कोरोना से ठीक होने के बाद भी मधुमेह के मरीजों में अन्य प्रकार के संक्रमण तथा रक्त शर्करा के स्तर में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं देखने में आ रही है। कोविड-19 तथा मधुमेह के बीच के इस संबंध को समझने के लिए ईटीवी भारत सुखी भव की टीम ने वी.आई.एन.एन अस्पताल हैदराबाद के जनरल फिजिशियन डॉक्टर राजेश वुक्कला से बात की।

डॉ राजेश बताते हैं कि यह बहुत दुखद बात है कि हमारे देश में मधुमेह रोगियों की जनसंख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसी के चलते हमारे देश में मधुमेह से पीड़ित लोगों में संक्रमण की गंभीरता तथा उसके पार्श्वप्रभाव ज्यादा विकराल रूप में नजर आ रहे है।

कोविड-19 तथा मधुमेह

डॉ राजेश बताते हैं कि मधुमेह के चलते कोविड-19 संक्रमितों की अवस्था तथा कोविड-19 तथा मधुमेह के बीच संबंध को तीन तरीकों से देखा और समझा जा सकता है।

  • मधुमेह के रोगियों में कोरोना संक्रमण अपेक्षा कृत ज्यादा गंभीर रूप में प्रभाव डालता है। जिसके चलते कई बार मरीज को जानलेवा पारिस्तिथ्यों का भी सामना करना पड़ता है।
  • मधुमेह पीड़ित लोग संक्रमण को लेकर ज्यादा संवेदनशील माने जाते है।

वर्तमान समय में कई ऐसे मामले भी सामने आ रहे है जिसमें संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में रक्त शर्करा के अनियंत्रित स्तर जैसी समस्याएं देखने में आ रही है । जानकारों का मानना है की व्यक्ति में कोरोना के निम्न तथा मध्यम स्तर के संक्रमण के लक्षण नजर आने पर उन्हे स्टेरॉइड देने आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में यदि किसी व्यक्ति को स्टेरॉयड दिए गए हो तो उसके शरीर पर रक्त शर्करा के अनियंत्रित स्तर जैसे नकारात्मक असर नजर आते हैं।

इसके अलावा यह भी देखा गया है कि ऐसे लोग जिनमें मधुमेह यानी रक्त शर्करा का स्तर संक्रमण से पहले निर्धारित सीमा के पास था, संक्रमण के उपरांत उनमें मधुमेह होने की पुष्टि हुई है।

कोरोना संक्रमितों में मधुमेह के कारण बढी जटिलता का एक और उदारहन ब्लैक फंगल संक्रमण के रूप में सामने आ रहा है। ।

स्टेरोइड तथा मधुमेह

डॉ राजेश बताते है की कोरोना के इलाज को लेकर उपलब्ध गाइडलाइन के अनुसार विशेष और गंभीर परिस्थितियों में लोगों में संक्रमण के प्रभाव को कम करने में उन्हें स्टेरॉयड देने से जीवन की रक्षा संभव है। लेकिन वर्तमान समय में कुछ कम अनुभवी चिकित्सक तथा ऐसे चिकित्सक जो कोरोना के इलाज को लेकर सिर्फ सरसरी जानकारी रखते है जरूरत न होने पर भी संक्रमितों को स्टेरॉयड लेने की सलाह दे रहे है। बगैर जरूरत इलाज के तौर पर स्टेरॉयड देने के गंभीर परिणाम न सिर्फ इलाज के दौरान बल्कि उसके उपरांत भी पार्श्वप्रभावो जैसे ब्लैक फंगस संक्रमण तथा शरीर पर मधुमेह के बढ़ते प्रभाव रूप में भी नजर आ रहे है।

लेकिन यहां यह भी जानना जरूरी है कि गंभीर रूप से संक्रमित कोरोना पीड़ितों में स्टेरॉयड संजीवनी की तरह काम कर सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि जरूरत के अनुसार स्टेरॉइड देना जीवन दायक हो सकता है लेकिन बगैर जरूरत और आवश्यकता के लोगों को स्टेरॉइड देना उनकी समस्याएं बड़ा भी सकता है।

क्यों व कब इस्तेमाल करना चाहिए स्टेरॉइड

जानकार बताते है कोरोना संक्रमण के निम्न तथा मध्यम स्तर पर आमतौर पर मरीज को स्टेरॉइड की आवश्यकता नही पड़ती है। लेकिन यदि मरीज मधुमेह से पीडित है तो उनकी अवस्था के आधार पर चिकित्सक उन्हे स्टेरॉइड देने का निर्णय ले सकते है। डॉ राजेश बताते हैं कि संक्रमित व्यक्ति को स्टेरॉइड देने का मुख्य उद्देश्य संक्रमण के चलते उसके शरीर के विभिन्न अंगों में उत्पन्न होने वाली सूजन को कम करना है जोकि आमतौर पर संक्रमण के दूसरे स्तर यानी 7 से 10 दिन के बाद ही नजर आती है। यहां यह जानना जरूरी है कि यदि स्टेरॉइड को सही समय पर सही मात्रा में नहीं दिया जाए तो शरीर पर उसके विपरीत असर नजर आते हैं, विशेष तौर पर मधुमेह रोगियों में इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। इलाज के दौरान यदि अवांछित या जरूरत से ज्यादा या कम मात्रा में स्टेरॉयड का उपयोग किया जाय तो यह मरीज के ठीक होने की रफ्तार पर भी असर डालता है।

क्या याद रखें

डॉ राजेश बताते हैं बिना जानकारी और बगैर जरूरत, उपलब्ध होने के बावजूद स्टेरॉइड का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसका इस्तेमाल सिर्फ चिकित्सक के निर्देशानुसार रोगी की अवस्था की गंभीरता के आधार पर ही किया जाना चाहिए। संक्रमण की अवधि में कुछ विशेष बातों को ध्यान में रखने जरूरी है ।

  • मधुमेह से पीड़ित लोगों को संक्रमण की अवधि जो कि 14 दिन मानी गई है के दौरान, नियमित तौर पर अपने शरीर में रक्त शर्करा के स्तर की जांच करनी चाहिए।
  • इलाज के दौरान यदि स्टेरॉइड दिया गया है तो उसकी डोज़ पूरी होने के बाद भी नियमित तौर पर मधुमेह के रोगियों को अपनी शुगर जाँचते रहना चाहिए।
  • तनाव भी व्यक्ति के शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को अनियंत्रित करता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि न सिर्फ संक्रमण से पीड़ित लोग बल्कि सभी जन तनाव व संत्रास से बचने के लिए हर संभव प्रयास करें।
  • जरूरी मात्रा में आराम और नींद, नियमित रूप से और समय पर दवाइयों का सेवन, संतुलित और हल्का भोजन शरीर और चित्त दोनों को स्वस्थ रखने में कारगर होता है।

डॉ राजेश बताते है की संक्रमण की अवधि या उसके बाद भी शरीर में किसी भी प्रकार की असमानता या असुविधा नजर आने पर या फिर किसी भी प्रकार के हल्के या गंभीर लक्षण नजर आने पर व्यक्ति को तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।