उस आत्मा के मूर्ति में प्रवेश करते ही बदल गई मूर्ति की सूरत

उस आत्मा के मूर्ति में प्रवेश करते ही बदल गई मूर्ति की सूरत

भगवान राम हों या श्री कृष्ण। राधा या सीता सभी परमात्मा के स्वरुप हैं। इन्होंने कुछ खास उद्देश्य को पूरा करने के लिए सामान्य मानवी रुप धारण किया था।

यह घटना भी ठीक उसी प्रकार की है जब एक देवी ने सामान्य कन्या के रुप में जन्म लेकर लीलाएं दिखानी शुरु की और इसका अंत ऐसा हुआ कि देखने वाले हैरान रह गए। यह घटना है भगवान श्री कृष्ण की नगरी जगन्नाथ पुरी की।

जगन्नाथ पुरी में भगवान श्री कृष्ण का एक मंदिर है जिसे साक्षी गोपाल के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि एक बार भक्त की गवाही देने के लिए भगवान गोपाल जी वृंदावन से उड़ीसा के फुलअलसा आए थे।



फुलअलसा में स्थित हुए गोपाल जी के विग्रह को कटक के राजा पुरी ले आए और यही पर साक्षी गोपाल जी को स्थापित कर दिया। लेकिन इसके बाद से ऐसा होने लगा कि जगन्नाथ जी को जाने वाला भोग गोपाल जी पहले ही भोग लगा लेते थे।

जगन्नाथ जी ने एक रात राजा को सपने में यह बात बताई तो राजा ने साक्षी गोपाल जी को पुरी से 16 किलोमीटर दूर ले जाकर एक मंदिर में स्थापित कर दिया। इसके बाद हुई अजब घटना हुई।

और बदल गई उस मूर्ति की सूरत

पुरी से दूर जाने पर गोपाल जी राधा से भी दूर हो गए। राधा जी का मन भी गोपाल जी के बिना नहीं लग रहा था। इसलिए साक्षी गोपाल मंदिर के पुजारी की कन्या के रुप में राधा जी ने जन्म लिया। इस कन्या का नाम पुजारी जी ने लक्ष्मी रखा। जब यह कन्या कुछ बड़ी हुई तो अजब सी लीलाएं होने लगी।

कभी गोपाल जी के मंदिर को सुबह खोलने पर लक्ष्मी के वस्त्र आभूषण मिलते तो कभी लक्ष्मी के कमरे से गोपाल जी की मालाएं मिलती। यह बात जब कटक के राजा के पास पहुंची तो पंडितों की सलाह पर गोपाल जी के पास राधा की मूर्ति स्थापित करने का विचार किया गया।

मूर्ति के स्थापित होते ही लक्ष्मी ने प्राण त्याग दिए और राधा की मूर्ति में लक्ष्मी की आत्मा समा गई। लोगों ने देखा कि राधा की मूर्ति की सूरत बदल गई है वह बिल्कुल पुजारी जी की कन्या लक्ष्मी जैसी दिख रही है।