एक असफल व्यक्ति आखिर क्या लिख सकता है? -चन्द्रहास

एक असफल व्यक्ति आखिर क्या लिख सकता है? -चन्द्रहास

एक असफल व्यक्ति आखिर क्या लिख सकता है? 
क्या उसकी लिखी बातें पढ़ी जाएंगी या उसके अक्षर डायरी के दो मोटे कवरों के बीच चीख़ चीख़कर दम तोड़ देंगे? अब आप सोच रहे होंगे अक्षर भी कभी बोलते हैं क्या। जी, बिल्कुल बोलते हैं! शायद आपने ठीक से सुना न हों। अक्षर, ज़ुबान से ज्यादा साफ बोलते हैं। अक्षर, जुबान से न कही जा सकने वाली बातों को भी बताते हैं। अक्षर, उन पीड़ाओं को भी बताते हैं जो शायद आंसू बनकर कभी नहीं बहते। हाँ वही पीड़ाएँ जो हृदय के अंदर सुनसान कब्रिस्तान में दफन हो होकर जागते रहते हैं। उन्हें मरा हुआ समझने की भूल भी शायद उसी पीड़ाओं में शामिल है। सिर्फ ढाँढस के कफ़न को उन पीड़ाओं को ढकने के लिए पर्याप्त समझा जाना अन्याय है। जमाने की स्वार्थता से विचलित होकर जमीन ने भी अपनी गोदी को सँकरा कर लिया है। ईर्ष्या जैसे आग की लपेट में आकर जँगल की लकड़ियाँ भी कम पड़ने लगी हैं।
.
मुझे लगता है किसी की खुशी पढ़ने के लिए उसके चेहरे को पढ़ा जाए। और किसी के घाव अथवा उस से उठ रहे दर्द को अनुभव करना हो तो उसके लिखे अक्षरों को तवज्जो दिया जाए। इस तरह आप उसके बारे में एक मनोवैज्ञानिक से भी ज्यादा जान पाएंगे।
.
कलम बेड़ियों में बंधी हुई नहीं है। अक्षरों के प्रति उसकी ईमानदारी प्रशंसा के योग्य है। कलम ही है जो असफल व्यक्ति की कहानी को सफल बनाती है। असफलता में भी सफलता ढूंढनी हो तो साहित्यिक किताबों में छिपे शब्दों का क्रमवार अध्ययन बहुत आवश्यक है। पर विडम्बना यह है कि हम उस युग के जीव हैं जहाँ कोरोना की तरह टेक्नोलॉजी ने भी सब तरफ अपने हाथ फैला रखे हैं। दुखद यह है कि जहाँ उसका अधिकार नहीं है वहाँ भी उसने अपना अधिकार जमाया है। पुस्तकालय में रखी कुछ किताबें उन पाठकों को झाँकती रहती हैं जो उनके अक्षरों को समझ सकें। साथ ही साथ उनकी भावनाओं को भी। उसी में छिपे होते हैं कुछ सीख़ और कुछ ऐसे राज़ जो हमे हमारी जीत के करीब ले जाने में मददगार होते हैं। जैसे जैसे आप एक असफल व्यक्ति के किताब को पढ़ते जाएंगे वैसे वैसे आपकी "असफलता" मिटती जाएगी ठीक वैसे ही जैसे रेत पर लिखा नाम लहरों के टकराव से मिट जाता है। सफल व्यक्ति सफलता का केवल एक कारण बताएगा। मग़र एक असफल व्यक्ति अपनी असफलता के उन सभी कारणों को बताएगा जिसे जानना शायद आपको सफलता की सीढ़ियों तक पहुँचने के लिए ज्यादा जरूरी होगा। 

-चन्द्रहास तिवारी । कलात्मक चन्द्र