फ्लेक्स फ्यूल की खूब चर्चा हो रही है! आखिर ये होता क्या है, क्यों पेट्रोल-डीजल से सस्ता होगा और कैसे लाएगा क्रांति?

भारत में वैकल्पिक ईंधन को लेकर विस्‍तार से प्लानिंग हो रही है. यहां इथेनॉल और मेथेनॉल को मिलाकर फ्लेक्स फ्यूल बनाया जा सकता है. इस इंजन के आने से वाहनों को पूरी तरह से पेट्रोल या डीजल या फिर इथेनॉल पर चला पाएंगे.

फ्लेक्स फ्यूल की खूब चर्चा हो रही है! आखिर ये होता क्या है, क्यों पेट्रोल-डीजल से सस्ता होगा और कैसे लाएगा क्रांति?

पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) की बढ़ती कीमतों के बीच इन दिनों  फ्लेक्स-फ्यूल   (Flex Fuel) की खूब चर्चा हो रही है. एक ओर सरकार जहां इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर फ्लेक्स-फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों पर. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) फ्लेक्स-फ्यूल से चलने वाले वाहनों (Flex Fuel Vehicles) पर प्लान तैयार कर रहे हैं. शनिवार को ‘ईटी ग्लोबल बिजनेस समिट’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ऑटो मोबाइल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने छह महीने के भीतर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के प्रोडक्शन का वादा किया है.

ब्राजील फ्लेक्स फ्यूल इंजनों का इस्तेमाल करने वाला सबसे बड़ा देश है. भारत में अभी इसका निर्माण शुरू नहीं हुआ है. फ्लेक्स फ्यूल के इस्तेमाल के लिए ऐसी गाड़ियां बाजार में उतारनी होंगी जो फ्लेक्स इंजन (Flex Engine) पर चलने वाली हों. ऐसी गाड़ियां दुनिया के कई हिस्सों में बनती हैं और चलती हैं. इनमें फ्लेक्स फ्यूल इंजन लगे होते हैं. फ्लेक्स फ्यूल इंजन एक तरह से इंटरनल कंबस्शन इंजन ही होता है जो एक से ज्यादा तरह के ईंधन से चल सकता है और आप चाहें तो इसे मिक्स फ्यूल पर भी चला सकते हैं.

आइए जानते हैं कि फ्लेक्स फ्यूल होता क्या है, इसके क्या फायदे हैं, इससे गाड़ियां कैसे चलेंगी और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच यह कैसे और कितना सस्ता साबित होगा.

क्या होता है फ्लेक्स फ्यूल?

फ्लेक्स-फ्यूल एक तरह से पेट्रोल-डीजल का विकल्प है. इसलिए इसे वैकल्पिक ईंधन भी कहा जाता है. यह गैसोलीन और मेथनॉल या इथेनॉल के मिश्रण से तैयार किया जाता है. फ्लेक्स (Flex) इंग्लिश के फ्लेक्सिबल (Flexible) शब्द से आया है. फ्लेक्स फ्यूल से फ्लेक्स इंजन चलेंगे. फ्लेक्स इंजन यानी जो बिना किसी दिक्कत के दूसरे ईंधन से भी चल सकते हों.

कैसे चलेंगी गाड़ियां?

भारत में वैकल्पिक ईंधन को लेकर विस्‍तार से प्लानिंग हो रही है. यहां इथेनॉल और मेथेनॉल को मिलाकर फ्लेक्स फ्यूल बनाया जा सकता है. इस इंजन के आने से वाहनों को पूरी तरह से पेट्रोल या डीजल या फिर इथेनॉल पर चला पाएंगे. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से इसकी वकालत करते आ रहे हैं. अब सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है.

क्यों सस्ता हो जाएगा फ्यूल?

फ्यूल में जिस इथेनॉल और मेथेनॉल को मिलाए जाने की बात हो रही है, वह एक तरह के बायो प्रोडक्ट हैं. इन्हें गन्ना, मक्का और दूसरे एग्री वेस्ट से तैयार किया जाता है. इसकी लागत भी कम होगी क्योंकि तैयार करने में कम खर्च आएगा. अगर फ्लेक्स फ्यूल इंजन बनाए जाते हैं ऐसे ईंधनों का इस्तेमाल हो सकेगा.

प्रदूषण कम फैलेगा

यह एक तरह से जैविक ईंधन है. इन ईंधनों से प्रदूषण भी कम फैलेगा. हमारे देश में प्रदूषण एक बड़ी समस्या है. गाड़ियों से निकलने वाला धुआं इसकी एक बड़ी वजह है. पेट्रोलियम ईंधन पर्यावरण के लिहाज से ठीक नहीं होते हैं. अगर फ्लेक्स फ्यूल इंधनों पर जोर दिया जाता है कि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा. इथेनॉल और मेथेनॉल जैसे ईंधन पर्यावरण को बहुत कम नुकसान पहुंचाएंगे.

किसानों को भी फायदा

भारत 80 फीसदी पेट्रोल-डीजल के लिए आयात पर निर्भर है. फ्लेक्स फ्यूल आने से निर्भरता खत्म होगी. हमारे देश में इथेनॉल उत्पादन इसलिए भी ज्यादा बढ़ सकता है क्योंकि हमारे यहां गन्ने और मक्के की उत्पादन दर अच्छी है. इन्हीं से इथेनॉल का उत्पादन होता है. इस वजह से किसानों की भी आर्थिक स्थिति सुधर सकती है.