Ye Jo Budget Hain-जंग की बर्बादियों से हुआ इनकम टैक्स का जन्म, अनोखी है ये दास्तान

Ye Jo Budget Hain-जंग की बर्बादियों से हुआ इनकम टैक्स का जन्म, अनोखी है ये दास्तान

हर साल जब आप अपने आयकर रिटर्न भरते हैं या जब आपकी सैलरी से अपने आप टैक्स कट (Tax Cut) जाता है तब आपके मन में ये सवाल तो जरूर उठता होगा कि आखिर कमाई पर टैक्स लेने की ये व्यवस्था कहां से पैदा हुई? दुनिया में इसकी कैसे और कहां शुरुआत हुई ये तो अहम है ही, अपने देश के नजरिए से ये जानना भी मौजूं है कि आखिर भारत में इसकी नींव कब और कैसे पड़ी? तो इसका जवाब आपको इतिहास (History of India) के पन्नों में दबा हुआ मिलेगा. यहां हम आपको इसी दिलचस्प किस्से को सुनाने जा रहे हैं. तो हुआ दरअसल कुछ यूं कि 1857 के गदर में भले ही  ईस्ट इंडिया कंपनी  (East India Company) जीत गई थी, लेकिन उसका कामकाज और पैसे-पानी का हिसाब-किताब पूरी तरह से उजड़ गया था. ब्रिटेन की महारानी को लगा कि भारत के पैसे से खजाना भरने का यही मौका है.

बस, क्या था भारत से ईस्ट इंडिया कंपनी के झंडे उतर गए और सीधा क्वीन विक्टोरिया का राज यानी ब्रिटिश सरकार की सत्ता भारत पर लागू हो गई. अब इतनी कहानी तो बड़ी सीधी-सपाट सी है, लेकिन इसके बाद का मसला थोड़ा सा कॉम्प्लेक्स या यूं कहें कि जटिल है.

अंग्रेज किरदार के इर्दगिर्द घूमती है कहानी

ये कहानी एक अंग्रेज किरदार के इर्दगिर्द घूमती है, जिसका नाम जेम्स विल्सन था. तो ब्रिटेन की महारानी ने जेम्स विल्सन को एक खास मकसद से वायसराय की काउंसिल के फाइनेंस मेंबर के तौर पर भारत भेजा. साल था 1859, लेकिन विल्सन को आखिर क्या खास काम दिया गया था? विल्सन को टैक्स स्ट्रक्चर, कागजी मुद्रा तैयार करने और देश के वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार करने का काम सौंपा गया था. कुल मिलाकर विल्सन को भारत से कमाई के तरीके ढूंढने थे.

अब आगे की कहानी पर बढ़ें उससे पहले ये भी जान लेते हैं कि आखिर ये जेम्स विल्सन थे कौन? तो जी ऐसा है कि विल्सन साब की गिनती ब्रिटेन के सफल कारोबारियों में होती थी. पिता के एक छोटे से कारोबार को पकड़कर उन्होंने सफलता की सीढ़ियां चढ़ने का जो सफर शुरू किया तो हर कोई हैरान रह गया.

इसे कुछ ऐसे समझ लीजिए कि स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की नींव विल्सन साब ने ही रखी थी. वे विचारक और विद्वान भी थे औऱ द इकोनॉमिस्ट जैसे प्रतिष्ठित अखबार की नींव भी उन्होंने रखी थी. महारानी की नजरों में उनकी बड़ी इज्जत थी.

ऐसे में भारत से पैसे की उगाही के लिए महारानी ने उन्हें ही चुना. विल्सन इंडिया आए तो ब्रिटेन के खस्ताहाल खजाने को बचाने के लिए उन्होंने भारत में इनकम टैक्स लगाने का फैसला किया. बस जी ये वही टैक्स की चक्की है जो आज भी चल रही है. अच्छा, चलिए थोड़ा सा और पीछे चलते हैं. आचार्य चाणक्य का नाम तो सुना ही होगा.

वे कूटनीतिज्ञ भी थे और बड़े अर्थशास्त्री भी. चाणक्य ने ही सबसे पहले ये जाना था कि टैक्स और युद्ध के बीच एक नजदीकी संबंध होता है. यानी लड़ाई होगी तो उसके खर्चे निपटाने के लिए आम जनता को ज्यादा टैक्स चुकाने पड़ते हैं. ये आज भी जारी है और ये पीछे से चला आ रहा है. ब्रिटेन में हेनरी द्वितीय ने 12वीं शताब्दी में तीसरे धर्मयुद्ध से लड़ने के लिए धन जुटाने के लिए “सलादीन तिथे या दशमांश” की शुरुआत की.

इस तरह से देखें तो आधुनिक दुनिया में इनकम टैक्स की शुरुआत जंग से जुड़ी हुई है. इसे ब्रिटेन में पहली बार 1799 में नेपोलियन युद्ध लड़ने के लिए पेश किया गया था. तो साब, विल्सन ने 1861 में भारत में आयकर की शुरुआत की.

इसी दौर में संयुक्त राज्य अमेरिका में भी पहली बार गृहयुद्ध (1861-65) से लड़ने के लिए आयकर पेश किया गया. पूर्व-आधुनिक राज्यों में शिक्षा, स्वास्थ्य या अन्य कल्याणकारी योजनाएं नहीं होती थीं. ऐसे में उनके पास एक मामूली व्यय वाला बजट होता था.

नेपोलियन युद्ध या अमेरिकी गृहयुद्ध जैसे बड़े पैमाने पर युद्ध या 1857 जैसे विद्रोहों को दबाने के लिए भारी खर्च की आवश्यकता थी और भू-राजस्व या कस्टम या सीमा शुल्क से नियमित आय के लिए एकमात्र तरीका आयकर लगाना जरूरी हो गया था.

बाद में आयकर एक स्थायी भाव बन गया. भारत में आयकर शुरू करने के तुरंत बाद जेम्स विल्सन का 1860 में निधन हो गया और उन्हें पूरी तरह से भुला दिया गया. 2007 में टैक्स अधिकारी सी पी भाटिया ने भारत में टैक्स के इतिहास पर शोध करते वक्त कोलकाता के मलिक बाज़ार कब्रिस्तान में विल्सन की कब्र को खोजा.

जेम्स विल्सन के समय से, सार्वजनिक व्यय की रूपरेखा और आयकर गणना की पेचीदगियों में कई परिवर्तन हुए हैं, लेकिन आज भी एक आम शख्स के लिए, भारतीय बजट का मुख्य महत्व आयकर के तहत आने वाला प्रस्ताव ही होता है.