वर्ल्ड लॉयन्स डे जानिए कैसे अपने जीवन को जीते है शेर ...

वर्ल्ड लॉयन्स डे जानिए कैसे अपने जीवन को जीते है शेर ...

आज "वर्ल्ड लॉयन्स डे" है. शेर एक स्तनपायी जानवर है. विज्ञान की भाषा में इसका नाम है- पैंथेरा लियो. ये अपने आकार में साढ़े चार से साढ़े छह फुट तक हो सकते हैं. इनकी पूंछ करीब 40 इंच तक लंबी हो सकती है. ये 36 फुट तक की छलांग लगा सकता है और छोटी दूरी में 50 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है. मजेदार ये है कि एक शेर दिन के 20 घंटे तक सो सकता है. आपने नर शेर की गरदन पर लंबे बाल देखे हैं? इन बालों से शेर की उम्र पता चल सकती है. ये जितना गहरा होगा, शेर उतना ही उम्रदराज होगा. 

शेर बड़े पारिवारिक जानवर होते हैं. अपने साथ वालों के साथ खूब सामाजिकता निभाते हैं. आमतौर पर शेर झुंड में रहते हैं, जिसे 'प्राइड' कहा जाता है. एक झुंड में तीन से लेकर 40 शेर तक हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर इसके सदस्यों की संख्या 15 होती है. ये साथ मिलकर शिकार करते हैं, बच्चे पालते हैं और अपना इलाका बनाए रखते हैं. 

मादा शेरनी बड़ी मेहनती होती है. ज्यादातर शिकार वही करती है. वहीं नर इलाका बनाए रखने का काम करता है. इनके झुंड में नर तो एक या दो ही होते हैं, लेकिन मादाओं का लंबा-चौड़ा खानदान साथ होता है. मतलब बेटी, मां, बहन, मौसी, नानी. इन मादाओं में गजब की एकजुटता होती है. झुंड की कई मादाएं कमोबेश एक साथ बच्चे पैदा करती हैं. फिर सारी मादाएं मिलकर बच्चों को बड़ा करती हैं. 

आमतौर पर झुंड की मादा शेरनियां पूरी जिंदगी अपने प्राइड के साथ रहती हैं. वहीं नर अक्सर कुछ साल ही रहते हैं. फिर या तो वो खुद झुंड छोड़कर चले जाते हैं या फिर उस झुंड में शामिल होने की कोशिश कर रहा कोई और नर उन्हें बाहर कर देता है. हालांकि झुंड में शामिल होने की कोशिश कर रहे इस बाहरी शेर से बचाव में मादाएं भी नर का खूब साथ देती हैं. कई बार झुंड में नया आया नर प्राइड के छोटे बच्चों को मार भी डालता है. इस तरह वो सुनिश्चित करता है कि अब उस झुंड में जो भी बच्चा होगा, वो उसी का होगा. 

बड़े डील-डौल वाले नर शेर की गरजती आवाज तो आपने सुनी ही होगी! ये आवाज इतनी ताकतवर होती है कि आठ किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है. शेर ज्यादातर अंधेरे में शिकार करते हैं. शिकार टीमजॉब होता है. दो-तीन के झुंड में मिलकर ये शिकार का पीछा करते हैं, उसे घेरते और मारते हैं. शिकार को खाने का पहला मौका ज्यादातर नर को मिलता है. फिर मादाएं खाती हैं. जो बचता है, वो बच्चों को मिलता है. 

एक वक्त शेर पूरे अफ्रीका, एशिया और यूरोप में पाए जाते थे. लेकिन अब ये केवल अफ्रीका में बचे हैं. एक अपवाद है भारत का गिर नैशनल पार्क. वो एशियाई शेरों का आखिरी बचा घर है. गिर नेशनल पार्क को खास इनके संरक्षण के लिए ही बनाया गया था. जून 2020 में हुई जनगणना में पाया गया कि पिछले पांच साल में यहां शेरों की आबादी 29 फीसदी बढ़ी है. वन विभाग की गिनती में यहां 674 शेर मिले थे. 

कई संस्कृतियों में शेर को जानवरों का राजा माना गया. बड़े आकार, ताकत और बेहद सुंदर-आकर्षक दिखने की वजह से पुराने दौर में शेर को दिव्य समझा जाता था. शेर के गुणों को देवत्व से जोड़कर देखा जाता था. मसलन, प्राचीन मिस्र की देवी सेखमेट जिन्हें शेर के सिर वाला दिखाया जाता था. कई जगहों पर चूंकि राजशाही के लोग धरती पर ईश्वरों के प्रतिनिधि समझे जाते थे, ऐसे में शेर भी राजसी प्रतीक बन गया.