Chhath Puja 2021 : जानें कौन हैं छठी मैया, दिवाली के छठे दिन क्यों होती है छठ मैया की पूजा

Chhath Puja 2021 : जानें कौन हैं छठी मैया, दिवाली के छठे दिन क्यों होती है छठ मैया की पूजा

नहाय खाय के साथ छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है और चार दिन तक इस उत्सव को धूमधाम से मनाया जाएगा। छठ के पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन शाम के समय सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। इस पूजा के चारों दिन लगन और निष्ठा के सूर्य के साथ-साथ छठी मैया की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि छठ के दूसरे दिन यानी खरना वाले दिन छठी मैया घर-घर आती हैं और अपना शुभ आशिष देती हैं। इनकी पूजा दीपावली के छठे दिन की जाती है। छठी मैया की वजह से ही इस पर्व का नाम छठ पड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठ पूजा के दूसरे दिन छठ मैया की पूजा की जाती है और उनसे संतान प्राप्ति और दीर्घायु की कामना की जाती है। आइए जानते हैं कौन है छठी मैया और इनसे जुड़ी पौराणिक कथा…

जानें कौन हैं छठी मैया
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, छठ पूजा में होने वाली छठी मैया भगवान ब्रह्माजी की मानस पुत्री और सूर्यदेव की बहन हैं। इन्हीं मैया को प्रसन्न करने के लिए छठ पूजा का आयोजन किया जाता है। पुराणों के अनुसार, जब ब्रह्माजी सृष्टि की रचना कर रहे थे, तब उन्होंने अपने आपको दो भागों में बांट दिया था। ब्रह्माजी का दायां भाग पुरुष और बांया भाग प्रकृति के रूप में सामने आया। प्रकृति सृष्टि की अधिष्ठात्री देवी बनीं, जिनको प्रकृति देवी के नाम से जाना गया। प्रकृति देवी ने अपने आपको छह भागों में विभाजित कर दिया था और इस छठे अंश को मातृ देवी या देवसेना के रूप में जाना जाता है। प्रकृति के छठे अंश होने के कारण इनका एक नाम षष्ठी भी पड़ा, जिसे छठी मैया के नाम से जाना जाता है। बच्चे के जन्म होने के बाद छठवें दिन जिस माता की पूजा की जाती है, यह वही षष्ठी देवी हैं। षष्ठी देवी की आराधना करने पर बच्चे को आरोग्य, सफलता का आशीर्वाद मिलता है।

इस तरह हुई छठ पूजा की शुरुआत
पुराणों के अनुसार, मनु के पुत्र प्रियंवद की काफी समय से कोई संतान नहीं थी, जिसको लेकर वह काफी परेशान होने लगे थे। तब महर्षि कश्यप ने संतान प्राप्ति के लिए राजा प्रियंवद और उनकी पत्नी मालिनी से एक यज्ञ अनुष्ठान करने को कहा। महर्षि कश्यप की आज्ञा से राजा प्रियंवद एक यज्ञ करवाया और रानी मालिनी से यज्ञ की आहुति के लिए बनी खाने को कहा, जिसके परिणाम स्वरूप रानी मालिनी गर्भवती हो गईं। लेकिन दुर्भाग्य से उनका बच्चा गर्भ में मर गया। जिससे राजा और उनकी प्रजा काफी दुखी हुई। तभी राजा ने आसमान से उतरती हुई एक चमकते पत्थर पर बैठी एक देवी को देखा।

निसंतान को संतान देती हैं छठी मैया
राजा ने देवी से परिचय पूछा। तब देवी ने कहा कि हे राजन, मैं ब्रह्माजी की मानस पुत्री षष्ठी हूं और मैं ही सभी बच्चों की रक्षा भी करती हैं। मेरे ही आशीर्वाद से निसंतान स्त्रियों को संतान की प्राप्ति होती है। तुम मेरी पूजा करो और दूसरों को भी पूजा करने के लिए प्रेरित करो। तब राजा ने षष्ठी देवी की व्रत-पूजा किया, जिससे उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। राजा प्रियंवद ने जिस दिन इस व्रत को रखा था, उस दिन कार्तिक मास की षष्ठी थी। तब से ही छठ के त्योहार की परंपरा शुरू हुई और संतान की रक्षा के लिए छठी मैया का व्रत किया जाने लगा।