कुपोषण से जंग जितना यहाँ नही आसान, जब अमानक मापदंड में तैयार रेडी टू ईट पोषण आहार परोसी जा रहा बच्चों को,जिम्मेदार आंख मूंदे हुए.....

कुपोषण से जंग जितना यहाँ नही आसान, जब अमानक मापदंड में तैयार रेडी टू ईट पोषण आहार परोसी जा रहा बच्चों को,जिम्मेदार आंख मूंदे हुए.....

कोरिया(छत्तीसगढ़)

रेडी टू ईट पोषण आहार या जिंदगी से खिलवाड़, महिला स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा घटिया रेडी टू ईट तैयार


कोरिया जिला के विकासखंड भरतपुर के महामाया स्व सहायता समूह खमरौध द्वारा घुने हुए सामग्री से किया जा रहा रेडी टू इट तैयार। जबकि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुपोषण जैसे गंभीर बिमारी को पुरे प्रदेश से जड़ से उखाड़ फैकने के लिए लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है, जिसमे से एक महत्वपूर्ण योजना रेडी टू ईट को माना जाता है , और राज्य सरकार द्वारा हर वर्ष कुपोषण को मिटाने के लिए करोडो रुपय भी खर्च किया जा रहा है, पर क्या इस योजना का लाभ वास्तव में कुपोषित बच्चो तक पहोच पा रहा है, य फिर यह योजना भी बिचोलियों के हाथ लग कर असफल हो जा रहा है।
हम बात कर रहे हैं महामाया महिला स्व सहायता समूह खमरौध का जहां घूने हुए गेहूं, घुने हुए सोयाबीन का उपयोग कर रेडी टू ईट तैयार किया जा रहा है इतना ही नहीं इस समूह द्वारा सही तरीके से गेहूं सोयाबीन चना की भुजाई भी नहीं की जा रही है। जिससे बच्चों को और गर्भवती महिलाओं को पोषण विहीन रेडी टू ईट वितरण किया जा रहा है।

जहां शासन द्वारा बच्चों के पोषण आहार मिले इसलिए रेडी टू इट बच्चों और गर्भवती महिलाओं को वितरण किया जाना है मगर इस तरह के गुणवत्ता विहीन सामग्रियों से रेडी टू ईट का निर्माण किया जा रहा है। जहां ग्राम पंचायत जूइली की महिलाओं ने बताया कि हमारे गांव में रेडी टू ईट दो-तीन महीने में एक बार ही दो तीन पैकट वितरण होता है।
इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी भरतपुर को सामग्री मिलान करने के बाद का सैंपल दिखाया गया तो उन्होंने कहा इस प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसे समूह पर उचित कार्रवाई भी की जाएगी।